उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली, सुरक्षा नियमों की अनदेखी, कर्मचारियों के शोषण के आरोप
आदाब खान, प्रदेश दस्तक
सोहागपुर। नगर में संचालित खनूजा एचपी गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। एजेंसी पर मनमानी वसूली, उपभोक्ताओं से हम्माली कराने, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और डोरस्टेप डिलीवरी नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी की व्यवस्था से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कड़ी मशक्कत के बाद मिलता है सिलेंडर
उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी की डिलीवरी सुविधा लगभग शून्य है। गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए पहले एजेंसी कार्यालय जाकर बुकिंग का ओटीपी दिखाकर पर्ची बनवानी पड़ती है। इसके बाद सिलेंडर लेकर डिस्ट्रीब्यूटर के प्रतिष्ठान के बाहर भुगतान काउंटर पर पहुंचना होता है, जहां फिर से पर्ची तैयार की जाती है। यदि उपभोक्ता ऑनलाइन भुगतान करना चाहता है तो उसे डिस्ट्रीब्यूटर के मुख्य कार्यालय में 15 से 20 मिनट तक मालिक की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के बाद सिलेंडर लेने के लिए लगभग 500 मीटर दूर रेलवे स्टेशन के समीप एक निजी प्लॉट पर जाना पड़ता है।
यहां उपभोक्ताओं को स्वयं अपना खाली सिलेंडर ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखना होता है और भरा हुआ सिलेंडर बिना वजन और सुरक्षा जांच के अपने दोपहिया वाहन पर लादकर घर ले जाना पड़ता है। इस दौरान सिलेंडर पकड़े सहायक को कई बार वाहन से उतरना और सिलेंडर ढोने की मजबूरी भी सामने आई है। जिससे अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं।
प्लॉट पर वितरण, फायर सेफ्टी नदारद
रेलवे स्टेशन के समीप स्थित एक निजी प्लॉट पर सिलेंडर वितरण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार वहां न तो फायर सेफ्टी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही सुरक्षा के अन्य मानकों का पालन किया जा रहा है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

होम डिलीवरी के नाम पर 50 रुपए अतिरिक्त वसूली
उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी द्वारा होम डिलीवरी के लिए 50 रुपए अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। जबकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की खुदरा कीमत में डोरस्टेप डिलीवरी चार्ज लगभग 30 रुपए शामिल होता है। गैस एजेंसी उपभोक्ता से निर्धारित मूल्य से अधिक कोई भी राशि नहीं ले सकती। इसके बावजूद कर्मचारियों द्वारा अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही है, जो नियमों के विरुद्ध है।

नियम क्या कहते हैं?
नियमों के अनुसार डिस्ट्रीब्यूटर का दायित्व है कि वह प्रत्येक उपभोक्ता को होम डिलीवरी सुविधा उपलब्ध कराए। यदि उपभोक्ता स्वयं अधिकृत गोदाम से सिलेंडर प्राप्त करता है तो उसे होम डिलीवरी चार्ज लगभग 30 रुपए की कटौती के बाद शेष राशि ही देनी होती है।
लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी ने आज तक किसी भी ग्राहक को होम डिलीवरी चार्ज वापस नहीं किया है। इससे स्पष्ट है कि नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
कर्मचारियों के शोषण के आरोप
एक डिलीवरी बॉय ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि एजेंसी संचालक द्वारा किसी भी डिलीवरी कर्मी को नियमित वेतन (तनख्वाह) नहीं दिया जाता। बल्कि कर्मचारियों को उपभोक्ताओं से ही 50 रुपए अतिरिक्त राशि लेने की मौन सहमति दी जाती है।
और यदि कोई उपभोक्ता शिकायत करता है तो एजेंसी संचालक संबंधित डिलीवरी बॉय को अपना कर्मचारी मानने से इनकार कर देता है। यह स्थिति न केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है, बल्कि कर्मचारियों के शोषण का मामला भी प्रतीत होती है। जो एक आपराधिक कृत्य है।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। यदि जांच सही तरीके से हो तो एजेंसी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कार्यवाही के बाद वर्षों से हो रही नियमों की अनदेखी और अवैध वसूली से आम नागरिकों को राहत मिलने की आशंका है और नियमों का पालन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
