“भविष्य की नई रहा : सोहागपुर में शिक्षा सुधार की कमान संभाल रही एसडीएम प्रियंका भल्लवी”

सोहागपुर।संवाददाता:- शेख आरिफ।

सोहागपुर// सरकारी स्कूलों की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। संसाधनों की कमी, शिक्षकों की कमी और आधारभूत सुविधाओं का अभाव बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनते रहे हैं। लेकिन सोहागपुर क्षेत्र में एसडीएम प्रियंका भल्लवी के प्रयासों से इन स्कूलों में सुधार की उम्मीदें जगने लगी हैं।

*निरीक्षण से मिली नई दिशा*

हाल ही में एसडीएम प्रियंका भल्लवी ने सोहागपुर क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया। खास बात यह रही कि उन्होंने खुद भी सरकारी स्कूल से अपनी शिक्षा प्राप्त की है, इसलिए उनके लिए इन विद्यालयों का भ्रमण केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का विषय भी था। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों से संवाद स्थापित किया, उनकी समस्याएँ सुनीं और अधिकारियों को कई ठोस सुझाव दिए। उनका मानना है कि जब तक सरकारी स्कूलों की स्थिति मजबूत नहीं होगी, तब तक शिक्षा का स्तर भी बेहतर नहीं हो पाएगा।

*सक्रियता और प्रयासों का असर*

एसडीएम भल्लवी की सक्रियता से स्कूलों में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कहीं भवनों की मरम्मत हो रही है तो कहीं बच्चों को आवश्यक उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। उनके नेतृत्व में किए गए प्रयासों से छात्रों में पढ़ाई के प्रति नया उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का भी मानना है कि जब क्षेत्र का प्रशासन इस तरह से समर्पित होकर काम करे तो निश्चित ही बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा।

*समाज का योगदान और ‘एक पंखा पितरों के नाम’ अभियान*

सरकारी तंत्र के साथ-साथ समाज भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। नर्मदापुरम जिले में कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला शिक्षा केंद्र द्वारा ‘एक पंखा पितरों के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत शिक्षक और स्थानीय नागरिक विद्यालयों को पंखे, पानी की टंकियाँ और अन्य सुविधाएँ दान कर रहे हैं। इस अभियान के तहत हाल ही में प्रतिमा देवी राजपूत ग्राम ईशरपुर ने माध्यमिक शाला ईशरपुर के लिए पंखे और प्राथमिक शाला ईशरपुर के लिए पानी की टंकी तथा अन्य सामग्री उपलब्ध कराई। शिक्षा विभाग ने इस योगदान की सराहना भी की है हालांकि यह पहल सराहनीय है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है। सुविधाओं की वास्तविक और स्थायी व्यवस्था सरकार द्वारा ही सुनिश्चित की जा सकती है।

“सुविधाओं का अभाव”:- चुनौतियाँ अब भी मौजूद* यह सच है कि सुविधाओं का अभाव सरकारी स्कूलों की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन केवल यही कारण नहीं है। शिक्षकों की कमी, समय पर सामग्री न मिलना और कई बार अभिभावकों का उदासीन रवैया भी बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित करता है। इन समस्याओं का समाधान केवल जनसहयोग या अस्थायी अभियानों से नहीं हो सकता। इसके लिए सरकार को ठोस नीतिगत कदम उठाने होंगे। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज करनी होगी, स्कूलों में आवश्यक उपकरण समय पर उपलब्ध कराना होगा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना होगा।

*छात्रों के उज्जवल भविष्य की नींव रख रहे दो समर्पित अधिकारी*

सोहागपुर क्षेत्र में एसडीएम प्रियंका भल्लवी और बीआरसी राकेश रघुवंशी का प्रयास और समाज का योगदान निश्चित ही सकारात्मक दिशा की ओर संकेत है। अगर प्रशासन, समाज और सरकार मिलकर काम करें तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल सकती है। बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और उनका भविष्य भी उज्ज्वल होगा।सरकारी स्कूलों की बेहतरी केवल शिक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि यह समाज के विकास, समान अवसर और आने वाली पीढ़ियों की नींव का सवाल है। एसडीएम प्रियंका भल्लवी जैसे समर्पित अधिकारियों के प्रयास इस दिशा में प्रेरणादायक कदम साबित हो सकते हैं।

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