संवादाता:- शेख आरिफ।
सोहागपुर// मछली पकड़ने के लिए करंट छोड़ने की करतूत ने मात्र दो साल के छोटे मगरमच्छ की जान ले ली। यह घटना 14 सितंबर की रात की है, जब दो आदिवासी मछुआरों ने नहर में 11 केवी बिजली का करंट छोड़ा और उसकी चपेट में आकर मगरमच्छ का बच्चा मर गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपियों ने शव को खेत में फेंककर छुपाने का प्रयास भी किया, लेकिन वन विभाग की चौकसी से मामला उजागर हो गया।
आरोपी कौन हैं
ग्राम सिंगवाड़ा (सोहागपुर) निवासी ओमप्रकाश पिता रमेश मर्सकोले और उत्तम पिता किशन सिंह उईके पर इस सनसनीखेज घटना का आरोप है। ये दोनों आदतन मछली पकड़ने का काम करते हैं।
घटना की परतें खुलीं
आरोपियों ने 14 सितंबर की रात बिजली के खंभे से तार खींचकर लगभग 100 फीट दूर नहर में करंट छोड़ा। इसी दौरान मगरमच्छ का बच्चा फंस गया और करंट से उसकी मौत हो गई। अगले दिन आरोपी ओमप्रकाश ने तार के सहारे शव को बाहर निकालकर खेत में फेंक दिया। 17 सितंबर को वन विभाग की टीम को खेत में शव मिला, जिसके पैर में जीआई तार और बांस का टुकड़ा बंधा था। यही साक्ष्य पूरे मामले में महत्वपूर्ण रहा।
वन विभाग की कार्रवाई
मुखबिर की सूचना पर एसडीओ मानसिंह मरावी और रेंजर सुमित पाण्डेय के नेतृत्व में टीम बनाई गई। वनपाल संजय तिवारी, वनरक्षक फुलेन्द्र रंजन और रोहित पटेल समेत अमले ने तफ्तीश कर दोनों आरोपियों को एक सप्ताह के भीतर गिरफ्तार कर लिया।
कबूल किया जुर्म
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे मछली पकड़ने के लिए करंट छोड़ते थे और उसी के चलते मगरमच्छ की मौत हुई।
कानूनी शिकंजा
वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2, 9, 39, 50 और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह अधिनियम वन्यजीवों के शिकार और शोषण को गंभीर अपराध मानते हुए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
