संवाददाता आदाब खान, प्रदेश दस्तक, सोहागपुर
भोपाल/सोहागपुर, 27 अक्टूबर 2025 — सोमवार को सोहागपुर विधायक विजयपाल सिंह ने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल में सौजन्य भेंट की। इस मुलाकात का प्रमुख विषय रहा सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के इको सेंसटिव जोन (ESZ) की सीमाओं का निर्धारण, जिसे लेकर विधायक ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया।
प्रतिनिधि मंडल भी रहा उपस्थित
विधायक विजयपाल सिंह के साथ मुलाकात के दौरान पिपरिया विधायक ठाकुरदास नागवंशी, सलकनपुर ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय, महेश शर्मा, कमल दूध, पवन झा तथा संदीप जैन सहित अन्य सदस्य प्रतिनिधि मंडल में उपस्थित रहे। इस दौरान सभी ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री से इको सेंसटिव जोन की सीमाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग रखी।
विधायक ने जताई चिंताएं — बताया नियमों का उल्लंघन
विधायक विजयपाल सिंह ने बताया कि वन एवं राजस्व विभाग के अधिकारी सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के इको सेंसटिव जोन की सीमाओं का मानचित्र तैयार करने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की अनदेखी की जा रही है, जो प्रभावित ग्रामीणों, शहरी क्षेत्रों तथा पर्यटन गतिविधियों को सीधे प्रभावित कर सकती है।

2017 का गजट नोटिफिकेशन — ग्रामीणों की आपत्तियां नहीं ली गईं
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा 9 अगस्त 2017 को सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान की परिधि में इको सेंसटिव जोन का गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित किया गया था।
हालांकि, प्रचार-प्रसार एवं मुनादी न होने के कारण प्रभावित पक्षों से आपत्तियां प्रस्तुत नहीं की जा सकीं।
विधायक ने सुझाव दिया कि नक्शे के साथ पुनः ग्राम स्तर पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएं।
इको सेंसटिव जोन की सीमा निर्धारित करने में की गई त्रुटि
नोटिफिकेशन के अनुसार, क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (कोर जोन) की सीमाओं से नगरीय व आबादी क्षेत्र में विस्तार सिर्फ 100 मीटर और अन्य क्षेत्रों में 2 किलोमीटर तक निर्धारित है।
लेकिन वर्तमान में तैयार किए जा रहे मानचित्र में संपूर्ण बफर एरिया — जिसमें राजस्व भूमि भी शामिल है — को इको सेंसटिव जोन बताया जा रहा है।
विधायक ने कहा कि यह नियमों और नोटिफिकेशन की कंडिका (1) का स्पष्ट उल्लंघन है।
कोर और बफर क्षेत्र के मानचित्रों में असंगति
विजयपाल सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय उद्यान द्वारा प्रकाशित कोर और बफर क्षेत्र के मानचित्र, पूर्व में प्रकाशित राजपत्रों —
3 जनवरी 2011 (बफर क्षेत्र) और 24 दिसंबर 2007 (कोर क्षेत्र) — से मेल नहीं खाते।
ऐसी स्थिति में इको सेंसटिव जोन सीमाएं तय करने से पहले पुराने नोटिफिकेशन और मानचित्रों का मिलान किया जाना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हुआ
उन्होंने यह भी कहा कि 12 अगस्त 2013 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के तहत 11 ग्रामों और एनक्लोजर क्षेत्रों को पचमढ़ी और बोरी अभ्यारण्य की सीमाओं से पृथक किया गया था।
इस क्षेत्र में वन्यप्राणी अधिनियम लागू नहीं होता।
इसलिए 2007 और 2011 के पुराने नोटिफिकेशन के आधार पर इको सेंसटिव जोन तय करना न्यायसंगत नहीं है।
पचमढ़ी कैंट और नजूल क्षेत्र को भी गलत तरीके से शामिल किया गया
विधायक ने बताया कि पचमढ़ी छावनी क्षेत्र, जो भारत सरकार के नियंत्रण में है, और नजूल क्षेत्र, जो राज्य शासन द्वारा अधिसूचित है, इन्हें पहले की अधिसूचनाओं में पृथक रखा गया था।
फिर भी, नवीन प्रस्तावित मानचित्र में इन शहरी क्षेत्रों को ग्रामीण क्षेत्र मानकर इको सेंसटिव जोन में शामिल किया गया है, जो विधि विरुद्ध है।
पर्यटन गतिविधियों को भी मानचित्र में दर्शाने की मांग
उन्होंने कहा कि कोर क्षेत्र के आसपास — विशेषकर पचमढ़ी नगर, मढ़ई क्षेत्र, और गटकुली क्षेत्र में — वर्षों से पर्यटन गतिविधियां संचालित हैं।
इको सेंसटिव जोन के प्रस्तावित नक्शे में इन सभी गतिविधियों को दिखाया जाना आवश्यक है, ताकि पर्यटन उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
मुख्यमंत्री से की मुख्य मांग
विधायक विजयपाल सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से निवेदन किया कि
शहरी और ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में इको सेंसटिव जोन का विस्तार 100 मीटर तक सीमित रखा जाए,
और बिना संबंधित क्षेत्रों की आपत्तियों व सुझावों को संज्ञान में लिए मानचित्र प्रकाशित न किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह विषय न केवल स्थानीय विकास बल्कि जनजीवन और पर्यावरण संतुलन दोनों से जुड़ा है।
संवाददाता आदाब खान, प्रदेश दस्तक, सोहागपुर
